Heer ranjha part 5

हीर-रांझा भाग 5


खुदा के करम से जंगल में चारों तरफ इस मौसम में घास ही घास थे। भैंसे इस तरह से कतार बनाकर चल पड़ीं जैसे लगा कि जमीन पर काला सांप रेंग रहा हो और रांझा अब उनका मालिक बनकर साथ चल रहा था।


Heer ranjha part 5

Heer ranjha part 5


रांझा ने खुदा का नाम लिया और जंगल में भैंसों को लेकर घुसा। धूप में चलते हुए रांझा गर्मी से बेहाल था और बहुत परेशान था। इस परेशानी की घड़ी में उसकी मुलाकात पांच पीरों (साधु) से हुई।

पीरों ने परेशान रांझा को दिलासा देते हुए कहा, ‘बच्चे, भैंसों का दूध पीओ और अपने मन से सारी उदासी को निकाल फेंको। खुदा सब कुछ ठीक कर देगा।’

रांझा बोला, ‘मैं बहुत मुश्किल में हूं। मुझे मेरी हीर दिला दिला दो। उसकी मुहब्बत की आग मुझे जलाकर खाक बना रही है।’

पीरों ने रांझे से कहा, ‘बच्चे, तुम्हारी हर आरजू पूरी होगी। तुम्हारा तीर निशाने पर जाकर लगेगा और तुम्हारी कश्ती को किनारा मिलेगा। हीर को खुदा ने तुम्हारे लिए बनाया है। मेरे बच्चे, जब कभी परेशानी में रहना, तुम हमें याद करना। घबराना मत, तुम्हारा कोई कुछ भी बिगाड़ नहीं पाएगा।’

पीरों की बात सुनकर रांझा की परेशानी दूर हो गई। वह भैंसों को जंगल में हांकता रहा। भैंसे भी उसके साथ रहकर खुश दिख रही थीं और जोर-जोर से बोलकर इस बात को बता रही थी।


हीर रांझा की जंगल में मुलाकात

हीर रांझा के लिए खाना लेकर सियालों के गांव से जंगल की ओर चली। हीर स्वर्ग से उतरी उन सौंदर्य के बादलों की तरह थी जो रेगिस्तान को चंदन के पेड़ों से हरा-भरा कर उसमें खुशबू भर सकती थी। हीर उस रूह की तरह रांझे की ओर जा रही थी जिसको पाकर मृत शरीर जी उठता है।

वह रांझे के पास अपने दिल में उठ रहे इश्क के तूफान को शांत करने के लिए जा रही थी। अब रांझे के प्यार में हीर पूरी तरह कैद हो चुकी थी। वह रांझे के लिए चावल, चीनी, मक्खन और दूध लेकर आई।

रांझा जैसे ही दिखा, उसकी आंखों में आंसू भर आए और वह रोते हुए कहने लगी- मैं तुम्हारी तलाश में पूरे जंगल में भटकती फिरी। हीर ने रांझे को बड़े प्यार से खाना परोसा।

रांझा उससे कहने लगा- मजहब में ऐसा कहा गया है कि औरतों के वादों पर यकीन नहीं करना चाहिए। लेकिन हीर, अगर तुम अपना वादा निभाओगी तो रांझा तुम्हारे लिए नौकर होने का गम भी बर्दाश्त कर जाएगा।

हीर ने जवाब दिया- औरतों की कौम के बारे में ऐसी बातें न करो। औरतों की तरह लगातार अपनी बातों पर दृढ़ रहने वाला और कोई नहीं होता। जोसफ के इश्क में जुलैखा ने अपना साम्राज्य छोड़ दिया।

महिवाल के प्यार में सोहनी नदी में डूब गई। लैला की मुहब्बत से सारा जहान वाकिफ है। पुन्नु के प्यार में जलते रेगिस्तान में भटकते हुए सस्सी का दम टूटा। शिरीं अपने आशिक फरहाद के लिए मर गई। पैगंबरों और संतों को औरतें ही तो जन्म देती हैं। क्या आदम और हव्वा एक जैसे नहीं थे?

हीर ने आगे कहा- मर्द औरतों की तरह मजबूत नहीं होते। कवियों से पूछो, वह इस बात को बखूबी जानते हैं। मैं तुमसे वादा करती हूं कि जब तक मेरी नसों में लहू बह रहा है तब तक मैं तुम्हारी गुलाम बनकर रहूंगी। तुम जो कहोगे, वही मैं करूंगी। अगर मुझे बाजार में बेचकर तुमको खुशी मिल सकती हो तो यह भी कर लेना।

इस तरह से हीर मीठी-मीठी बातों से रांझे के सवालों का सामना करती रही और अपना दिल खोलकर उसके सामने रख दिया।

हीर बोली- जब हम दुश्मनों से घिर जाएंगे, तब तुम पूरे धैर्य के साथ जंग लड़ना। प्यार के समंदर में किस्मत की ऐसी जबर्दस्त लहरें हैं जो हमें या तो साहिल तक पहुंचाएंगी या हमें डूबो देंगी। मेरे दुष्ट चाचा कैदु से सावधान रहना।

 वह शैतान जैसा है। दुनिया हमें अपमानित करेगी। जो हमें नहीं जानते वे भी हमारे ऊपर ताने कसेंगे। लेकिन सच्चे आशिक इन सब बातों से नहीं डरते। वो इश्क में जान तक दे दे देते हैं। प्यार करने वालों का खुदा के अलावा कोई मददगार नहीं होता।

अब हीर रोज खाना लेकर रांझा के पास जंगल में जाने लगी और उसने सच्चे प्रेमी होने की कसम खाई। हीर ने चरखा कातना छोड़ दिया और सखियों के साथ उसका उठना-बैठना भी छूट गया। वह रांझा के साथ दिनभर रहने लगी। रांझे की संगत में उसने खुद को आजाद छोड़ दिया।

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