Wo Jaan hai MERI

Wo Jaan hai MERI


हर फूल की अजब कहानी है, चुप रहना भी प्यार की निशानी है, कहीं कोई ज़ख्म नही फिर भी क्यों यह एहसास है, लगता है दिल का एक टुकड़ा आज भी उस के पास है …


Wo Jaan hai MERI
Wo Jaan hai MERI


उसकी नज़र को फुरसत न मिली होगी, वरना मेरा मर्ज़ इतना लाइलाज़ न था, हमने तो वहां भी मोहब्बत ही की , जहाँ मोहब्बत का रिवाज न था …


ज़िन्दगी एक सजा सी लगने लागि, ग़म की आँधियो में इस कदर उलझने लगी, गलती हमारी भी थी की हमने प्यार का इज़हार न किया, और वो किसी और से प्यार करने लगी।


Wo Jaan hai MERI
Wo Jaan hai MERI


गुस्ताखी ये है हमारी। हर किसी से रिश्ता जोड़ लेते है।। लोग कहते है मेरा दिल पत्थर का है।। लेकिन।।ऐ दोस्त।।कुछ लोग ऐसे भी है जो इसे भी तोड़ देते है।

आपकी आँखों से ओझल हो जायेंगे हम, दूर कहीं खो जायेंगे हम, रोयेंगे आप लिपट कर हमारी यादों से , जब राख बनकर हवा मै खो जायेंगे हम …


Wo Jaan hai MERI
Wo Jaan hai MERI


जाने क्यों लोग हमें आज़माते है , कुछ पल साथ रहने के बाद दूर चले जाते है , सच ही कहते हैं लोग की सागर के मिलने के बाद , लोग बारिश को भूल जाते है …

मेरे ख्वाबों में आना आपका कसूर था , आप से दिल लगाना हमारा कसूर था , आप आये थे ज़िन्दगी में पल दो पल के लिए , आपको ज़िन्दगी समझ लेना हमारा कसूर था ।


Wo Jaan hai MERI
Wo Jaan hai MERI


कदम यूँही डगमगा गए रास्ते में , वरना सम्भालना हम भी जानते थे , ठोकर भी लगी तो उस पत्थर से , जिसे हम अपना भगवान मानते थे ।

Wo Jaan hai MERI
Wo Jaan hai MERI

जान कर भी तुम मुझे जान न पाए , आज तक तुम मुझे पहचान न पाए , खुद ही की है बेवाफ़ाई हम ने , ता की तुझ पे कोई इलज़ाम न आये.

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